मां बगलामुखी की उपासना से दूर होती है हर बाधा, जानें मां की 16 दिव्य शक्तियां
हिंदू धर्म और तंत्र परंपरा में विशेष स्थान रखने वाली मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है। पीताम्बरा देवी के नाम से प्रसिद्ध मां बगलामुखी को ऐसी अधिष्ठात्री शक्ति माना जाता है, जो शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और शक्ति को सुन्न कर देती हैं।
हिंदू धर्म और तंत्र परंपरा में विशेष स्थान रखने वाली मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है। पीताम्बरा देवी के नाम से प्रसिद्ध मां बगलामुखी को ऐसी अधिष्ठात्री शक्ति माना जाता है, जो शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और शक्ति को सुन्न कर देती हैं। मान्यता है कि उनकी उपासना से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।
क्यों खास है बगलामुखी जयंती?
हर वर्ष वैशाख शुक्ल अष्टमी को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 24 अप्रैल को आई है। इस दिन को विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय, न्यायिक मामलों में सफलता और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
मां की 16 दिव्य शक्तियां
तंत्र शास्त्र के अनुसार मां बगलामुखी 16 प्रकार की महाशक्तियों का केंद्र है, जो साधक को अजेय बनाती है।
1. स्तंभिनी: शत्रु की चाल और प्रगति को रोक देती है
2. जंभिनी: अहंकार तोड़कर विरोधी को निर्बल बनाती है
3. मोहिनी: आकर्षण और प्रभाव बढ़ाती है
4. वशंकरी: परिस्थितियों को अनुकूल बनाती है
5. द्राविणी: नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है
6. आकर्षणी: आकर्षण शक्ति पैदा करती है
7.क्षोभणी: शत्रु के मन में भय और तनाव पैदा करती है
8. साधना: एकाग्रता और आध्यात्मिक शक्ति देती है
9. भय नाशिनी: हर प्रकार के डर को समाप्त करती है
10. विजय: हर प्रतियोगिता में जीत दिलाती है
11. रोग निवारण: स्वास्थ्य लाभ में सहायक
12. बुद्धि दात्री: सही निर्णय लेने की क्षमता देती है
13. शत्रु नाशिनी: गुप्त शत्रुओं का अंत करती है
14. संकट हरणी: आकस्मिक संकटों से रक्षा
15. वाक् सिद्धि: वाणी को प्रभावशाली बनाती है
16. अजेय शक्ति: साधक को अडिग और अपराजेय बनाती है
जीभ खींचने के रहस्य का क्या है अर्थ?
मां बगलामुखी की सबसे प्रसिद्ध छवि में वे शत्रु की जीभ पकड़े नजर आती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में ‘मदन’ नामक असुर ने कठोर तपस्या से वाक्-सिद्धि प्राप्त कर ली थी। उसकी बोली हर बात को सच कर देती थी और इसी शक्ति के घमंड में उसने सृष्टि में विनाश फैलाना शुरू कर दिया। तब भगवान विष्णु की प्रार्थना पर मां बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने असुर की जीभ पकड़कर उसकी वाणी को स्तंभित कर दिया, जिससे उसका आतंक समाप्त हो गया। यह रूप इस बात का प्रतीक है कि बुराई को खत्म करने से पहले उसकी अभिव्यक्ति को रोकना जरूरी है।
प्रकट होने की दो प्रमुख कथाएं
मां बगलामुखी के अवतरण को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं जिनमें से ये दो खास है
1. एक कथा के अनुसार, एक राक्षस ने ब्रह्मा जी का ग्रंथ चुरा लिया था। तब ब्रह्मा की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी प्रकट हुईं और बगुले का रूप धारण कर राक्षस का वध कर ग्रंथ वापस दिलाया।
2. दूसरी कथा के अनुसार, सतयुग में भयंकर तूफान से पृथ्वी संकट में आ गई थी। तब भगवान शिव के निर्देश पर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति की साधना की, जिसके फलस्वरूप गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील से मां बगलामुखी प्रकट हुईं और सृष्टि को विनाश से बचाया।
आस्था और शक्ति का अद्भुत संगम
मां बगलामुखी की आराधना को आज भी शत्रु-विजय, न्यायिक सफलता और जीवन की बड़ी बाधाओं से मुक्ति का अचूक उपाय माना जाता है। उनका संदेश साफ है जब संकट बड़ा हो, तो धैर्य, साधना और सही शक्ति ही रास्ता दिखाती है।
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